जब किसी महिला को एडवांस स्टेज (तीसरे या चौथे चरण) का ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होने का पता चलता है, तो डॉक्टर इलाज के मुख्य हिस्से के रूप में कीमोथेरेपी की सलाह देते हैं। लेकिन जब चिकित्सा टीम दवा देने के अलग-अलग तरीकों जैसे “नस के जरिए” या “सीधे पेट के अंदर” देने की बात करती है, तो मरीज और उनका परिवार गहरे असमंजस में पड़ जाता है। वे अक्सर पूछते हैं, “डॉक्टर साहब, इनमें से कौन सा तरीका हमारी मरीज के लिए ज्यादा सुरक्षित और असरदार रहेगा?”
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि हम मरीजों को उनके इलाज से जुड़ी हर छोटी-बड़ी वैज्ञानिक बात को बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझा सकें। कीमोथेरेपी की दवा को शरीर के भीतर पहुंचाने के दो मुख्य रास्ते हैं—इंट्रावीनस (Intravenous – IV) कीमोथेरेपी और इंट्रापैरिटोनियल (Intraperitoneal – IP) कीमोथेरेपी। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से समझते हैं कि इन दोनों तकनीकों में क्या अंतर है, इनके क्या फायदे हैं और एडवांस ओवेरियन कैंसर में कौन सा रास्ता सबसे बेहतर साबित होता है।
दवा देने के इन दोनों रास्तों की कार्यप्रणाली एक-दूसरे से काफी अलग होती है:
यह कीमोथेरेपी देने का सबसे आम और पुराना तरीका है। इसमें दवा को सीधे मरीज के हाथ की नस (Vein) के जरिए या छाती में डाले गए एक छोटे से कीमो-पोर्ट (Chemo Port) के माध्यम से शरीर में पहुंचाया जाता है।
यह एडवांस ओवेरियन और पेरिटोनियल कैंसर के लिए विकसित की गई एक विशेष पद्धति है। इसमें दवा को किसी नस में डालने के बजाय, सीधे पेट के खाली हिस्से यानी पेरिटोनियल कैविटी (Peritoneal Cavity) के अंदर डाला जाता है, जहां अंडाशय का कैंसर फैला होता है।
इन दोनों पद्धतियों के बीच के अंतर को हम कुछ मुख्य मापदंडों के आधार पर आसानी से समझ सकते हैं:
| मापदंड | इंट्रावीनस (IV) कीमोथेरेपी | इंट्रापैरिटोनियल (IP) कीमोथेरेपी |
| दवा देने का रास्ता | हाथ की नस या कीमो-पोर्ट के जरिए। | सीधे पेट के खाली हिस्से (कैविटी) में पोर्ट द्वारा। |
| दवा का फैलाव | पूरे शरीर के रक्त प्रवाह में घूमकर कैंसर तक पहुंचती है। | सीधे प्रभावित कैंसर कोशिकाओं और पेट की झिल्ली को भिगोती है। |
| दवा की सांद्रता (Concentration) | पेट के भीतर दवा का असर सीमित मात्रा में पहुंच पाता है। | पेट के अंदर दवा की सांद्रता IV के मुकाबले कई गुना अधिक होती है। |
| साइड इफेक्ट्स का दायरा | पूरे शरीर पर सामान्य दुष्प्रभाव (जैसे बाल झड़ना, कमजोरी) दिखते हैं। | पेट में भारीपन या हल्का दर्द हो सकता है, लेकिन पूरे शरीर पर असर कम होता है। |
एडवांस ओवेरियन कैंसर की यह प्रकृति होती है कि वह मुख्य रूप से पेट के अंदरूनी हिस्से की झिल्ली (पेरिटोनियम) पर छोटे-छोटे दानों या परतों के रूप में फैलता है। ऐसी स्थिति में सीधे पेट में दवा (IP) देने के निम्नलिखित बेजोड़ फायदे होते हैं:
क्या दोनों को मिलाकर दिया जा सकता है?: हाँ, चिकित्सा विज्ञान में इसे IV/IP कंबाइंड कीमोथेरेपी कहा जाता है। इसमें कैंसर को दोनों तरफ से घेरा जाता है—खून के रास्ते से भी और सीधे पेट के रास्ते से भी। यह तालमेल एडवांस ओवेरियन कैंसर में बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखने में बेहद मददगार साबित हुआ है।
यह समझना बहुत जरूरी है कि सीधे पेट में दी जाने वाली कीमोथेरेपी हर ओवेरियन कैंसर के मरीज को नहीं दी जा सकती। इसके लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें होती हैं:
अहमदाबाद में हमारे सेंटर पर, विशेषज्ञों की टीम हर मरीज की रिपोर्ट, उनकी शारीरिक क्षमता और सर्जरी के बाद बचे हुए हिस्सों का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही दवा देने के सही रास्ते का चुनाव करती है।
चाहे इलाज IV रास्ते से हो रहा हो या IP रास्ते से, कीमोथेरेपी के दौरान घर पर सही देखभाल मरीज की हीलिंग को दोगुना बढ़ा देती है:
एडवांस ओवेरियन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में इंट्रावीनस (IV) और इंट्रापैरिटोनियल (IP) कीमोथेरेपी दोनों ही अपनी-अपनी जगह बेहद शक्तिशाली हथियार हैं। तकनीक का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज के शरीर के अनुकूल क्या है। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह अटूट विश्वास है कि केवल दवाओं को देना ही काफी नहीं है, बल्कि सही रास्ते (Route) का सटीक चयन ही मरीज को एक आरामदायक और लंबा जीवन दे सकता है। बीमारी से डरें नहीं; सही वैज्ञानिक विकल्पों को समझें और पूरे हौसले के साथ इस सफर को तय करें।
⭕अधिक जानकारी के लिए आप देख सकते हैं: https://bit.ly/3tVg9sJ
#HIPEC #chemotherapy #treatment #cancerawareness #cancer #cancerfree #healthcare #fightagainstcancer #cancerclinix #letsfightcancer #healthyliving #fitness #medical #science #surgery #surgeon #doctor #health #healthtip #stayhealthy #gujarat #ahmedabad
CRS-HIPEC सर्जरी की सर्जरी (CRS + HIPEC) का खर्च Apollo Hospital, Bhat में लगभग ₹5,50,000 से ₹7,00,000 तक आता है।
अंतिम राशि इन बातों पर निर्भर करती है — ऑपरेशन किस पद्धति से हुआ (open, laparoscopic या robotic), अस्पताल में कितने दिन रुकना पड़ा, ICU की ज़रूरत पड़ी या नहीं, और इलाज insurance या cashless के तहत है या नहीं।
आपके केस के अनुसार सटीक अनुमान consultation के बाद ही दिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए +91 63590 11009 पर संपर्क करें।
ओवेरियन कैंसर की जानकारी और सर्जरी के लिए: Indian Ovary Cancer Institute, Ahmedabad। सर्जन — Dr Swati Shah (Uro-Gynec Oncologist), Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad। संपर्क: 6359011009।
स्वस्थ परिवार: महीने में दो बार रिकवरी, खान-पान और ख़तरे के लक्षणों पर काम की सलाह। कोई विज्ञापन नहीं। जब चाहें बंद करें।
आपका नंबर यह जानकारी भेजने के लिए और clinic के आपसे संपर्क करने के लिए उपयोग होता है। इसे कभी बेचा या किसी को दिया नहीं जाता। बंद कराने के लिए WhatsApp पर STOP लिखें।