ओवेरियन कैंसर के लक्षण पेट में दर्द पेट बढ़ना भूख न लगना बार बार पेशाब आना वजन कम होना थकान
ओवेरियन कैंसर (अंडाशय के कैंसर) के जोखिम कारकों (Risk Factors) के बारे में है, यानी वे कौन सी वजहें या परिस्थितियां हैं जो किसी महिला में इस कैंसर के होने की संभावना को बढ़ा देती हैं।
जोखिम कारक होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कैंसर होगा ही, बल्कि इससे केवल संभावना (Risk) बढ़ती है। ओवेरियन कैंसर के मुख्य जोखिम कारकों को निम्नलिखित श्रेणियों में समझा जा सकता है:
1. आनुवंशिक और पारिवारिक इतिहास (Genetic & Family History)
- BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन: यदि किसी महिला के शरीर में विरासत (Inherited) में मिले BRCA1 या BRCA2 जीन में खराबी (Mutation) होती है, तो उनमें ओवेरियन और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।
- पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में मां, बहन या बेटी को पहले ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल (आंत का) कैंसर रहा हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।
- लिंच सिंड्रोम (Lynch Syndrome): यह एक आनुवंशिक विकार है जो कोलोरेक्टल कैंसर के साथ-साथ ओवेरियन कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है।
2. उम्र और प्रजनन इतिहास (Age & Reproductive History)
- बढ़ती उम्र: यह कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 50 से 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- देर से गर्भावस्था या कभी गर्भवती न होना: जिन महिलाओं ने कभी बच्चे को जन्म नहीं दिया है या जिनकी पहली फुल-टर्म प्रेग्नेंसी 35 वर्ष की उम्र के बाद हुई है, उनमें इसका जोखिम थोड़ा अधिक होता है।
- जल्दी पीरियड्स और देर से मेनोपॉज: यदि मासिक धर्म (Periods) 12 वर्ष की उम्र से पहले शुरू हुआ हो और मेनोपॉज 52 वर्ष की उम्र के बाद हुआ हो, तो शरीर लंबे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रभाव में रहता है, जिससे जोखिम बढ़ता है।
3. जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े कारक (Lifestyle & Health Factors)
- मोटापा (Obesity): अधिक वजन या मोटापा शरीर में हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है, जो ओवेरियन कैंसर (विशेषकर एपिथेलियल कैंसर) के खतरे को बढ़ाता है।
- हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT): मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए लंबे समय तक केवल एस्ट्रोजन या एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन कंबाइंड थेरेपी लेने से जोखिम बढ़ सकता है।
- एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय के अंदर पाए जाने वाले टिश्यूज गर्भाशय से बाहर (जैसे अंडाशय पर) बढ़ने लगते हैं। इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा थोड़ा अधिक होता है।
जोखिम को कम करने वाले कारक (Protective Factors)
कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो इस कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करती हैं, जैसे:
सर्जरी: हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालना) या ट्यूबलोक्टोमी (नसबंदी) कराने से भी खतरा कम होता है।
गर्भनिरोधक गोलियां (Oral Contraceptives): 5 या उससे अधिक वर्षों तक इन गोलियों का उपयोग करने से जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
स्तनपान (Breastfeeding) और गर्भावस्था: बच्चे को जन्म देना और स्तनपान कराना जोखिम को कम करता है।
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ऑपरेशन का खर्च कितना आता है?
अंडाशय के कैंसर की सर्जरी (ovarian cytoreduction) का खर्च Apollo Hospital, Bhat में लगभग ₹2,50,000 से ₹5,00,000 तक आता है।
अंतिम राशि इन बातों पर निर्भर करती है — ऑपरेशन किस पद्धति से हुआ (open, laparoscopic या robotic), अस्पताल में कितने दिन रुकना पड़ा, ICU की ज़रूरत पड़ी या नहीं, और इलाज insurance या cashless के तहत है या नहीं।
आपके केस के अनुसार सटीक अनुमान consultation के बाद ही दिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए +91 63590 11009 पर संपर्क करें।