
जब किसी महिला को एडवांस स्टेज (तीसरे या चौथे तबक्के) का ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होने का पता चलता है, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। पेट में पानी भरना, अत्यधिक सूजन और दर्द के बीच मरीज और उनके अपने गहरे अवसाद में चले जाते हैं। इस नाजुक मोड़ पर, सही और प्रामाणिक चिकित्सा जानकारी ही एकमात्र संबल बनती है। एडवांस ओवेरियन कैंसर के इलाज का सबसे मजबूत स्तंभ है—साइटोरिडक्टिव सर्जरी (Cytoreductive Surgery), जिसे आम भाषा में डीबल्किंग सर्जरी (Debulking Surgery) भी कहा जाता है।
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि मरीजों को इस जटिल बीमारी के खिलाफ सबसे आधुनिक और संवेदनशील इलाज मिल सके। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से सीधे और सरल शब्दों में समझते हैं कि यह सर्जरी क्या है, पेट के कैंसर में इसकी भूमिका कितनी बड़ी है और यह कैसे मरीजों को एक नया जीवन देने में मददगार साबित हो रही है।
अन्य कैंसरों की तुलना में ओवेरियन कैंसर की प्रकृति थोड़ी अलग होती है। जब यह एडवांस स्टेज में पहुंचता है, तो यह किसी एक बड़ी गांठ के रूप में रहने के बजाय पूरे पेट के अंदरूनी हिस्से की झिल्ली (पैरिटोनियम), आंतों की सतह, लिवर के ऊपर और अन्य अंगों पर छोटे-छोटे दानों या परतों के रूप में फैल जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल मुख्य गांठ को निकाल देना काफी नहीं होता। ‘साइटो’ का अर्थ है कोशिका और ‘रिडक्टिव’ का अर्थ है कम करना। साइटोरिडक्टिव सर्जरी का मुख्य उद्देश्य पेट के भीतर दिखाई देने वाले कैंसर के हर एक छोटे-बड़े हिस्से, गांठ और परत को काटकर शरीर से बाहर निकालना है।
डॉक्टरों की भाषा में इसका अंतिम लक्ष्य “ऑप्टिमल डीबल्किंग” प्राप्त करना होता है। इसका मतलब है कि ऑपरेशन के अंत में पेट के अंदर कैंसर का कोई भी ऐसा हिस्सा न बचे जो नग्न आंखों से देखा जा सके या जिसकी मोटाई १ सेंटीमीटर से अधिक हो। पेट के अंदर कैंसर का बोझ जितना कम होगा, इलाज की सफलता की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाती है।
कई लोग सोचते हैं कि जब कैंसर पूरे पेट में फैल चुका है, तो सर्जरी करने से क्या फायदा? लेकिन ओवेरियन कैंसर के मामले में वैज्ञानिक शोध कुछ और ही कहते हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
यह एक बेहद जटिल और लंबी चलने वाली सर्जरी है, जिसके लिए अत्यधिक कुशल ऑन्को-सर्जनों (कैंसर सर्जनों) की टीम और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इसे मरीज की स्थिति के अनुसार दो तरीकों से प्लान किया जाता है:
यदि मरीज का शरीर मजबूत है और कैंसर इस स्थिति में है कि उसे पहली बार में ही पूरा निकाला जा सके, तो सीधे सर्जरी की जाती है। इसके बाद मरीज को कीमोथेरेपी के चक्र दिए जाते हैं।
अक्सर एडवांस स्टेज में बीमारी इतनी ज्यादा फैली होती है कि तुरंत पूरी सर्जरी करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मामलों में, हम पहले मरीज को नियॉएडजुवेंट कीमोथेरेपी (Neoadjuvant Chemotherapy) के ३ चक्र देते हैं। इससे कैंसर काफी हद तक सिकुड़ जाता है, पेट का पानी सूख जाता है और मरीज की हालत बेहतर होती है। इसके ठीक बाद ‘इंटरवल सर्जरी’ करके बचे हुए कैंसर को पूरी तरह साफ कर दिया जाता है और फिर बाकी की कीमोथेरेपी पूरी की जाती है।
आजकल साइटोरिडक्टिव सर्जरी की प्रभावकारिता को और बढ़ाने के लिए HIPEC (Hyperthermic Intraperitoneal Chemotherapy) का उपयोग किया जाता है। जब सर्जन पेट से सारी दिखाई देने वाली गांठें निकाल देते हैं, तब ऑपरेशन थिएटर में ही मरीज के पेट के अंदर कीमोथेरेपी की दवा को लगभग ४२ डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके ९० मिनट के लिए घुमाया जाता है। यह गर्म दवा छिपे हुए सूक्ष्म कैंसर सेल्स को ढूंढकर नष्ट कर देती है।
चूंकि यह एक बड़ी सर्जरी है, इसलिए ऑपरेशन के बाद मरीज को पूरी तरह ठीक होने में थोड़ा समय लगता है। परिवार को इस दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
एडवांस स्टेज ओवेरियन कैंसर बेशक एक गंभीर चुनौती है, लेकिन साइटोरिडक्टिव सर्जरी और कीमोथेरेपी के सही तालमेल से आज सैकड़ों महिलाएं इस बीमारी को हराकर एक लंबा और खुशहाल जीवन जी रही हैं। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह अटूट विश्वास है कि अत्याधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के सही मिश्रण से हर मरीज को सर्वश्रेष्ठ उपचार दिया जा सकता है। डर को अपने ऊपर हावी न होने दें; सही समय पर सही विशेषज्ञ की सलाह ही इस कठिन रास्ते को आसान बना सकती है।
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