
जब किसी परिवार में उनकी माता, बहन, पत्नी या किसी प्रियजन को लेट-स्टेज (तीसरे या चौथे चरण का) ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होने का पता चलता है, तो मानो पूरा परिवार एक गहरे अंधेरे में डूब जाता है। मन में अनगिनत सवाल उठने लगते हैं—”अब आगे क्या होगा?”, “क्या इसका कोई इलाज संभव है?”, “क्या हमारी मरीज फिर से सामान्य जिंदगी जी पाएगी?”
ऐसी नाजुक स्थिति में घबराहट और उदासी होना स्वाभाविक है, लेकिन आज के इस आधुनिक चिकित्सा युग में एडवांस स्टेज कैंसर का मतलब ‘उम्मीदों का खत्म होना’ बिल्कुल नहीं है। चिकित्सा विज्ञान ने पिछले कुछ वर्षों में इतनी अभूतपूर्व प्रगति की है कि अंतिम चरणों के कैंसर में भी मरीज के जीवन को न केवल लंबा किया जा सकता है, बल्कि उनकी जिंदगी की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) को भी बेहद शानदार बनाया जा सकता है।
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा उद्देश्य केवल कैंसर का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज और उनके परिवार को इस पूरी सगाई में हूनर, हिम्मत और सही वैज्ञानिक रास्ता दिखाना है। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के दृष्टिकोण से समझते हैं कि लेट-स्टेज ओवेरियन कैंसर वास्तव में क्या है और इसके खिलाफ कैसे एक मजबूत व सफल लड़ाई लड़ी जा सकती है।
ओवेरियन कैंसर को अक्सर एक ‘शांत बीमारी’ (Silent Disease) कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि महिला को किसी गंभीर बीमारी का अंदेशा ही नहीं होता। पेट में गैस बनना, हल्का दर्द या भारीपन जैसे लक्षणों को आमतौर पर घरेलू नुस्खों या साधारण दवाओं से दबा दिया जाता है। यही कारण है कि लगभग ७0% से अधिक मामलों में इस कैंसर का निदान तब होता है जब यह तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है।
कैंसर के इलाज की शुरुआत अस्पताल से नहीं, बल्कि मरीज और परिवार के मन से होती है। जब कोई मरीज यह ठान लेता है कि उसे इस बीमारी को हराना है, तो दवाओं का असर भी दुगना हो जाता है। लेट-स्टेज के निदान के बाद इंटरनेट पर मौजूद अधूरी और पुरानी जानकारियों को पढ़कर निराश न हों। पुरानी सांख्यिकी और आज की आधुनिक चिकित्सा तकनीकों में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे मरीज के आसपास हमेशा सकारात्मक और खुशहाल माहौल बनाए रखें।
आज के समय में कैंसर का इलाज किसी एक डॉक्टर या एक दवा तक सीमित नहीं है। इसके लिए ‘मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच’ अपनाई जाती है, जिसमें कैंसर सर्जन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और सपोर्टिव केयर टीम मिलकर मरीज के अनुकूल एक विशेष ‘ट्रीटमेंट चार्ट’ तैयार करते हैं।
लेट-स्टेज ओवेरियन कैंसर के इलाज में सर्जरी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसे आम भाषा में ‘डीबल्किंग सर्जरी’ (Debulking Surgery) भी कहते हैं।
कई बार निदान के समय कैंसर पेट के संवेदनशील अंगों में इस कदर फैला होता है कि तुरंत बड़ा ऑपरेशन करना मरीज के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सा विज्ञान की एक बेहतरीन पद्धति काम आती है—नियॉएडजुवेंट कीमोथेरेपी।
यह तकनीक एडवांस ओवेरियन कैंसर के मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। साइटोरिडक्टिव सर्जरी पूरी होने के ठीक बाद, जब मरीज अभी ऑपरेशन थियेटर में ही होता है, तब एक विशेष मशीन के जरिए कीमोथेरेपी की दवा को लगभग ४२ डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके सीधे पेट के खोखले हिस्से (पेरिटोनियल कैविटी) के अंदर ९० मिनट के लिए घुमाया जाता है। यह गर्म दवा उन सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को ढूंढ-ढूंढकर नष्ट कर देती है जो नग्न आंखों से दिखाई नहीं देतीं, जिससे भविष्य में कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा काफी कम हो जाता है।
कुछ चुनिंदा मामलों में, जहाँ बीमारी को कीमोथेरेपी से सिकोड़ दिया गया हो या इंटरवल असेसमेंट करना हो, वहाँ अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की मदद ली जाती है। रोबोटिक आर्म्स की बेजोड़ फ्लेक्सिबिलिटी और ३D हाई-डेफिनेशन विजन के कारण सर्जन पेट के गहरे कोनों में छिपे कैंसर को भी बिना बड़े चीरे के, बेहद बारीक तरीके से निकाल सकते हैं। इसमें खून का रिसाव कम होता है और मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है।
पारंपरिक कीमोथेरेपी के चक्र पूरे होने के बाद, कैंसर को दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए आज हमारे पास आधुनिक दवाएं उपलब्ध हैं जिन्हें ‘टार्गेटेड थेरेपी’ कहा जाता है। इसमें PARP Inhibitors (जैसे Olaparib या Niraparib) नाम की ओरल दवाइयां (कैप्सूल/गोलियां) शामिल हैं। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं के डीएनए रिपेयर सिस्टम को ब्लॉक कर देती हैं जिससे वे खुद-ब-खुद नष्ट हो जाती हैं। इन दवाओं को मरीज घर पर रहकर आसानी से ले सकते हैं और इनके साइड इफेक्ट्स भी बहुत कम होते हैं।
अस्पताल के इलाज के साथ-साथ घर पर की जाने वाली देखभाल मरीज को जल्दी स्वस्थ बनाने में ईंधन का काम करती है:
एडवांस स्टेज ओवेरियन कैंसर निश्चित रूप से एक कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा है, लेकिन आज के दौर में यह अजेय नहीं है। सही समय पर कुशल ऑन्को-सर्जन का चयन, आधुनिक तकनीकों जैसे साइटोरिडक्टिव सर्जरी व HIPEC का सही तालमेल और परिवार का अटूट भावनात्मक साथ मिलकर इस बीमारी पर विजय पा सकते हैं। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि चिकित्सा की सर्वोच्च तकनीक और मानवीय संवेदनाएं जब एक साथ मिलती हैं, तो हर अंधियारी राह में आसा की नई किरण फूटती है। हिम्मत बनाए रखें और पूरे विश्वास के साथ इस लड़ाई को लड़ें।
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