
जब किसी मरीज को पेरिटोनियल कैंसर (पेट की अंदरूनी परत का कैंसर) होने का पता चलता है, तो पारंपरिक कीमोथेरेपी की सीमाएं अक्सर इलाज की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाती हैं। चूंकि यह कैंसर किसी एक ठोस गांठ के रूप में रहने के बजाय पूरे पेट की रेशमी झिल्ली पर एक महीन परत या अनगिनत छोटे दानों के रूप में फैलता है, इसलिए नस के जरिए दी जाने वाली साधारण कीमोथेरेपी इसके केंद्र तक पूरी मात्रा में नहीं पहुंच पाती।
चिकित्सा विज्ञान के इस आधुनिक दौर में, इस चुनौती को पार करने के लिए एक क्रांतिकारी और कस्टमाइज्ड तकनीक विकसित की गई है, जिसे HIPEC (Hyperthermic Intraperitoneal Chemotherapy) यानी हाइपेक (गर्म कीमोथेरेपी) कहा जाता है। यह तकनीक आज पेरिटोनियल कैंसर के मरीजों के लिए लंबे और स्वस्थ जीवन की एक बेहद मजबूत उम्मीद बनकर उभरी है।
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कैंसर केयर मिल सके। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझते हैं कि पेरिटोनियल कैंसर के लिए हाइपेक तकनीक क्या है, यह कैसे काम करती है और इसके क्या बेजोड़ फायदे हैं।
हाइपेक कोई स्वतंत्र रूप से की जाने वाली सुई या थेरेपी नहीं है। यह एक विशेष दो-चरणीय (Two-Step) इलाज है, जिसे पूरी तरह ऑपरेशन थिएटर के भीतर अंजाम दिया जाता है:
इलाज की शुरुआत एक व्यापक और बेहद बारीक सर्जरी से होती है। सर्जन का मुख्य लक्ष्य पेट को खोलकर वहां मौजूद सभी दिखाई देने वाली कैंसर की गांठों, प्रभावित अंगों के हिस्सों और पूरी दूषित पेरिटोनियल झिल्ली को काटकर शरीर से बाहर निकालना होता है। इसे पेट की पूरी सफाई या ‘डीबल्किंग’ कहते हैं। जब पेट के अंदर कोई भी बड़ी गांठ नहीं बचती, तब असली काम शुरू होता है हाइपेक का।
सफलतापूर्वक सर्जरी पूरी होने के ठीक बाद, जब मरीज अभी ऑपरेशन थिएटर में बेहोश (एनेस्थीसिया के असर में) ही होता है, तब पेट को सिलने से पहले एक अत्याधुनिक हाइपेक मशीन को मरीज के पेट से अस्थायी कैथेटर (विशेष नलियों) के जरिए जोड़ा जाता है।
पेरिटोनियल कैंसर में पारंपरिक कीमोथेरेपी के मुकाबले हाइपेक के सफल होने के पीछे दो बेहद मजबूत वैज्ञानिक कारण हैं:
शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारे व्यापक सर्जिकल अनुभव के आधार पर पेरिटोनियल कैंसर में हाइपेक के निम्नलिखित फायदे देखे गए हैं:
चूंकि यह एक बहुत बड़ी और संयुक्त प्रक्रिया है, इसलिए ऑपरेशन के बाद मरीज को पूरी तरह ठीक होने में थोड़ा समय और धीरज की आवश्यकता होती है:
पेरिटोनियल कैंसर निश्चित रूप से एक जटिल और गंभीर बीमारी है, लेकिन आज के आधुनिक चिकित्सा युग में इसे ‘लाइलाज’ मानकर उम्मीद छोड़ देना सही नहीं है। साइटोरिडक्टिव सर्जरी और हाइपेक (HIPEC) जैसी उन्नत तकनीकों के सही तालमेल से आज इस बीमारी को बहुत प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा रहा है। अहमदाबाद में हमारे सेंटर का अनुभव यही सिखाता है कि सही समय पर लिया गया सही सर्जिकल फैसला और सकारात्मक पारिवरिक माहौल ही कैंसर के खिलाफ इस जंग की सबसे बड़ी पूंजी है। डर को छोड़ें, आधुनिक विज्ञान की ताकत पर भरोसा रखें और विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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