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  • May 21, 2026
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प्रोस्टेट कैंसर और PSA टेस्ट: अर्धशतक की उम्र के बाद हर पुरुष के लिए जरूरी समझ

अहमदाबाद के शाह्स कैंसर सेंटर में ५० वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष मरीज को PSA टेस्ट की रिपोर्ट और प्रोस्टेट स्वास्थ्य के बारे में समझाते हुए वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट।

जब कोई पुरुष जीवन के पचासवें वर्ष यानी अर्धशतक की उम्र में प्रवेश करता है, तो समाज में इसे परिपक्वता और अनुभव का दौर माना जाता है। लेकिन सेहत के दृष्टिकोण से, यह वह समय है जब शरीर को विशेष ध्यान और नियमित जांच की जरूरत होती है। पुरुषों में उम्र के इस पड़ाव पर प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर नाम है—प्रोस्टेट कैंसर।

चूंकि हमारे संस्थान का मुख्य ध्यान महिलाओं में ओवेरियन कैंसर और पुरुषों व महिलाओं दोनों में जटिल रोबोटिक सर्जरी पर केंद्रित है, शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर (Shah’s Cancer & Robotic Surgery Centre), अहमदाबाद में हम अक्सर ऐसे परिवारों से मिलते हैं जहां घर के मुखिया अपनी सेहत को नजरअंदाज करते हैं। एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के रूप में, मैं हर उस पुरुष को जो ५० की उम्र पार कर चुका है, एक बेहद सरल लेकिन जीवन रक्षक जांच की सलाह देता हूँ—जिसे PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट कहा जाता है। आइए इस विषय को विस्तार से और बेहद सरल भाषा में समझते हैं।

प्रोस्टेट ग्रंथि और प्रोस्टेट कैंसर क्या है?

प्रोस्टेट केवल पुरुषों में पाई जाने वाली एक छोटी, अखरोट के आकार की ग्रंथि होती है, जो मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) के ठीक नीचे स्थित होती है। इसका मुख्य काम उस द्रव्य (प्रक्लेश) का निर्माण करना है जो वीर्य का हिस्सा बनता है और शुक्राणुओं को पोषण देता है।

उम्र बढ़ने के साथ, विशेषकर ५० वर्ष के बाद, इस ग्रंथि की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव आने की संभावना बढ़ जाती है। जब ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह प्रोस्टेट कैंसर का रूप ले लेती हैं। अच्छी बात यह है कि प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर बहुत धीमी गति से बढ़ता है, और यदि इसका सही समय पर पता चल जाए, तो इसे बेहद प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।

PSA टेस्ट क्या है और यह क्यों जरूरी है?

PSA का पूरा नाम प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन है। यह एक प्रकार का प्रोटीन है जिसे प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाएं ही बनाती हैं। इसे जांचने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह एक सामान्य ब्लड टेस्ट (खून की जांच) है।

  • सामान्य स्थिति: स्वस्थ पुरुषों के खून में PSA की मात्रा बहुत कम होती है।
  • असामान्य स्थिति: यदि प्रोस्टेट ग्रंथि में कोई समस्या हो, जैसे कि सूजन, ग्रंथि का सामान्य रूप से बढ़ना (BPH), या प्रोस्टेट कैंसर, तो खून में PSA का स्तर बढ़ने लगता है।

महत्वपूर्ण बात: खून में PSA का स्तर बढ़ा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपको कैंसर ही है। यह प्रोस्टेट में किसी अन्य सामान्य खराबी या इंफेक्शन का संकेत भी हो सकता है। इसलिए, बढ़ा हुआ PSA मिलने पर घबराने के बजाय यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट (मूत्र एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ) से सलाह लेना सही कदम है।

५० की उम्र के बाद किन लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए?

शुरुआती दौर में प्रोस्टेट कैंसर के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि ५० की उम्र के बाद नियमित PSA टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है, नीचे दिए गए लक्षण सामने आ सकते हैं:

  • पेशाब करने में कठिनाई होना या शुरुआत करने में समय लगना।
  • रात के समय बार-बार पेशाब जाने की आवश्यकता महसूस होना।
  • पेशाब की धार का कमजोर या धीमा होना।
  • पेशाब या वीर्य में खून के अंश दिखाई देना।
  • पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों या जांघों में लगातार दर्द रहना (एडवांस स्टेज में)।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो इसे केवल ‘उम्र का असर’ मानकर नजरअंदाज न करें।

बढ़े हुए PSA और प्रोस्टेट कैंसर के लिए आधुनिक जांच और उपचार

यदि किसी पुरुष का PSA स्तर लगातार बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर स्थिति की सटीकता जांचने के लिए डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन (DRE), प्रोस्टेट का MRI या बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। बायोप्सी से ही कैंसर होने की अंतिम पुष्टि होती है।

यदि कैंसर का निदान होता है, तो आधुनिक चिकित्सा में इसके इलाज के बेहद सटीक और सुरक्षित तरीके मौजूद हैं:

१. एक्टिव सर्विलांस (नियमित निगरानी)

चूंकि प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीमी गति से बढ़ता है, इसलिए बुजुर्ग मरीजों में या शुरुआती स्टेज के कैंसर में तुरंत किसी आक्रामक इलाज (जैसे सर्जरी या कीमोथेरापी) की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर नियमित अंतराल पर PSA टेस्ट और स्कैन करके केवल नजर रखते हैं।

२. रोबोटिक रेडिकल प्रोस्टेटक्टॉमी (Robotic Surgery)

यदि कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि के अंदर ही सीमित है और इसे पूरी तरह निकालना जरूरी है, तो रोबोटिक सर्जरी आज के समय में दुनिया भर में सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती है। हमारे अहमदाबाद स्थित सेंटर में हम इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं।

  • चोकसई और सुरक्षा: रोबोटिक आर्म्स ३D विजन के साथ सर्जन को बेहद बारीक नसों और मांसपेशियों को बचाते हुए केवल प्रभावित हिस्से को निकालने की अनुमति देते हैं।
  • तेजी से रिकवरी: पारंपरिक ओपन सर्जरी के मुकाबले इसमें बहुत छोटा चीरा लगता है, खून का रिसाव न के बराबर होता है, दर्द कम होता है और मरीज बहुत जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट आता है। पेशाब पर नियंत्रण खोने (Incontinence) का खतरा भी इस तकनीक से न्यूनतम हो जाता है।

३. हार्मोन थेरेपी और रेडिएशन

एडवांस स्टेज में, पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरोन हार्मोन (जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करता है) को दवाइयों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसके अलावा, रेडिएशन थेरेपी की मदद से भी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

पुरुषों के लिए स्वास्थ्य संबंधी व्यावहारिक सलाह

  • नियमित जांच का नियम बनाएं: ५० वर्ष की आयु पार करते ही अपने वार्षिक हेल्थ चेकअप में PSA टेस्ट को जरूर शामिल करें। यदि परिवार में पहले किसी को प्रोस्टेट या ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, तो ४५ की उम्र से ही यह जांच शुरू कर देनी चाहिए।
  • स्वस्थ जीवनशैली: अपने आहार में टमाटर (जिसमें लाइकोपीन होता है), हरी सब्जियां और फल शामिल करें। रेड मीट और अत्यधिक वसायुक्त भोजन से परहेज करें।
  • सक्रिय रहें: रोजाना ३० मिनट का व्यायाम या वॉक वजन को नियंत्रित रखने और प्रोस्टेट को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

निष्कर्ष

उम्र का अर्धशतक पूरा करना जीवन का एक खूबसूरत पड़ाव है, और इसे स्वस्थ रहकर ही पूरी तरह जिया जा सकता है। प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं या कैंसर का नाम सुनकर डरना स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर ली गई PSA टेस्ट जैसी छोटी सी सावधानी बड़े संकटों को टाल सकती है। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि ‘सही समय पर सही निदान ही सर्वोत्तम उपचार है’। अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें और किसी भी शंका की स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श करने में संकोच न करें।

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