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  • May 20, 2026
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HIPEC (गरम इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) का उपयोग इन कैंसर के लिए है: • ओवेरियन कैंसर • अपेंडिक्स का कैंसर • प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर • स्यूडोमीक्सोमा

अहमदाबाद के शाह्स कैंसर सेंटर में एडवांस ओवेरियन कैंसर के मरीज और उनके परिवार को डिजिटल प्रेजेंटेशन के जरिए गर्म इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) की पूरी कार्यप्रणाली समझाते हुए वरिष्ठ ऑन्को-सर्जन।

जब किसी मरीज या उनके परिवार को यह पता चलता है कि पेट या अंडाशय (Ovary) का कैंसर एडवांस स्टेज (तीसरे या चौथे चरण) में पहुंच चुका है, तो मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या अब भी कोई ऐसी उम्मीद बाकी है जो जिंदगी को लंबी और आरामदायक बना सके? पारंपरिक तौर पर, पेट में फैले इस तरह के एडवांस कैंसर के लिए केवल नस से दी जाने वाली कीमोथेरेपी ही मुख्य सहारा होती थी। लेकिन आज, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने हमें एक ऐसी क्रांतिकारी और अचूक सर्जिकल विधा दी है जिसने इलाज के परिणामों को पूरी तरह बदल दिया है। इस आधुनिक पद्धति का नाम है HIPEC (Hyperthermic Intraperitoneal Chemotherapy) यानी गर्म इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी

इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि मरीजों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार मिल सकें। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझते हैं कि यह गर्म इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी क्या है, यह पेट के एडवांस कैंसरों पर कैसे काम करती है और यह मरीजों के लिए आशा की एक नई किरण क्यों बनी है।

गर्म इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) क्या है?

HIPEC कोई साधारण कीमोथेरेपी नहीं है जिसे डे-केयर वार्ड में इंजेक्शन के जरिए दिया जा सके। यह एक विशेष दो-चरणीय (Two-Step) कंबाइंड सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह से ऑपरेशन थिएटर के भीतर ही अंजाम दिया जाता है:

चरण १: साइटोरिडक्टिव सर्जरी (Cytoreductive Surgery)

इलाज के पहले हिस्से में कैंसर सर्जन मरीज के पेट को खोलकर वहां मौजूद सभी दिखाई देने वाली कैंसर की गांठों, ट्यूमर, प्रभावित अंगों के हिस्सों और दूषित झिल्लियों को पूरी सटीकता से काटकर शरीर से बाहर निकाल देते हैं। इसे पेट की पूरी सफाई या ‘डीबल्किंग’ (Debulking) कहा जाता है। जब पेट के अंदर कोई भी बड़ी गांठ नहीं बचती, तब असली काम शुरू होता है हाइपेक का।

चरण २: हाइपेक (गर्म दवा का प्रवाह)

सफलतापूर्वक सर्जरी पूरी होने के ठीक बाद, जब मरीज अभी ऑपरेशन थिएटर में बेहोश (एनेस्थीसिया के असर में) ही होता है, तब पेट को सिलने से पहले एक अत्याधुनिक हाइपेक मशीन को मरीज के पेट से अस्थायी कैथेटर (विशेष नलियों) के जरिए जोड़ा जाता है। यह मशीन कीमोथेरेपी की तरल दवा को ४२ डिग्री सेल्सियस (लगभग १०७.६ डिग्री फारेनहाइट) के नियंत्रित तापमान पर गर्म करती है। इसके बाद, इस गर्म दवा को सीधे मरीज के खाली पेट के अंदर (इंट्रापेरिटोनियल कैविटी) डाला जाता है और लगातार ९० मिनट तक पेट के कोने-कोने में घुमाया जाता है।

दवा को गर्म करने और सीधे पेट में देने के पीछे का विज्ञान

पेरिटोनियल और ओवेरियन कैंसर में पारंपरिक कीमोथेरेपी के मुकाबले हाइपेक के सफल होने के पीछे दो बेहद मजबूत और गहरे वैज्ञानिक कारण हैं:

  • मल्टीप्लाइड सेल किलिंग (गर्मी का असर): कैंसर की कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अत्यधिक तापमान या गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पातीं। ४२ डिग्री सेल्सियस की गर्मी मिलते ही कैंसर कोशिकाओं की बाहरी सुरक्षात्मक दीवार कमजोर हो जाती है, जिससे कीमोथेरेपी की दवा उनके भीतर बहुत गहराई तक और तेजी से प्रवेश करके उन्हें नष्ट कर देती है। इसे ‘थर्मल एन्हांसमेंट’ कहते हैं।
  • रक्त-पेरिटोनियल बाधा (Blood-Peritoneal Barrier) को तोड़ना: हमारे शरीर में पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) की बनावट ऐसी होती है कि नस (IV) से दी गई कीमोथेरेपी दवा रक्त प्रवाह से पूरी मात्रा में झिल्ली की सतह तक नहीं छन पाती। सीधे पेट में दवा भरने से यह प्राकृतिक बाधा पूरी तरह खत्म हो जाती है और कैंसर कोशिकाओं को सीधे दवाओं के समंदर में डुबो दिया जाता है।

एडवांस कैंसर के मरीजों के लिए HIPEC के बेजोड़ फायदे

शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारे व्यापक सर्जिकल अनुभव के आधार पर पेट और ओवेरियन कैंसर में हाइपेक के निम्नलिखित फायदे देखे गए हैं:

  • अचूक और शक्तिशाली खुराक: चूंकि दवा सीधे पेट के प्रभावित हिस्से में डाली जाती है और पूरे शरीर के रक्त प्रवाह में बहुत कम अवशोषित होती है, इसलिए डॉक्टर पारंपरिक कीमोथेरेपी के मुकाबले कई गुना ज्यादा शक्तिशाली खुराक सुरक्षित रूप से दे सकते हैं।
  • न्यूनतम दुष्प्रभाव (Side Effects): नस से दी जाने वाली कीमोथेरेपी के कारण मरीजों को होने वाली अत्यधिक कमजोरी, गंभीर उल्टी, मुंह के छाले और इम्युनिटी का गंभीर रूप से कम होना जैसे दुष्प्रभाव हाइपेक में बेहद कम होते हैं, क्योंकि दवा पेट के दायरे से बाहर बहुत कम जाती है।
  • जलोदर (Ascites) पर पूर्ण नियंत्रण: एडवांस ओवेरियन या पेरिटोनियल कैंसर के मरीजों में पेट में बार-बार तेजी से पानी भरने की गंभीर समस्या होती है, जिसके कारण सांस फूलने लगती है। हाइपेक तकनीक पेट की झिल्ली की पानी बनाने की असामान्य क्षमता को नियंत्रित करती है जिससे पानी दोबारा नहीं भरता।
  • जीवन प्रत्याशा में वृद्धि: क्लिनिकल अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि साइटोरिडक्टिव सर्जरी के साथ हाइपेक का तालमेल एडवांस पेट के कैंसर के मरीजों के जीवन को केवल पारंपरिक कीमोथेरेपी पर रहने वाले मरीजों की तुलना में काफी लंबा, सक्रिय और आरामदायक बनाता है।

यह आधुनिक उपचार किन मरीजों के लिए उपयोगी है?

हाइपेक थेरेपी पेट के उन विशिष्ट कैंसरों में सबसे ज्यादा असरदार साबित होती है जो पेट की अंदरूनी परत यानी पेरिटोनियम झिल्ली में फैल जाते हैं। मुख्य रूप से:

  • एडवांस स्टेज (स्टेज ३ और ४) का एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर)।
  • प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर (Primary Peritoneal Cancer)।
  • सूडोमायक्सोमा पैरिटोनी (Pseudomyxoma Peritonei) या जेली बेली (Jelly Belly)।
  • अपेंडिक्स का कैंसर (Appendix Cancer)।
  • पेट (Stomach) या कोलोन (बड़ी आंत) का कैंसर जो पेट के अंदर फैल चुका हो।

उपचार के बाद रिकवरी और परिवार के लिए व्यावहारिक गाइड

चूंकि यह एक बहुत बड़ी और संयुक्त प्रक्रिया है, इसलिए ऑपरेशन के बाद मरीज को पूरी तरह ठीक होने में थोड़ा समय और धीरज की आवश्यकता होती है:

  • अस्पताल में विशेष निगरानी: मरीज को आमतौर पर ऑपरेशन के बाद शुरुआती ३ से ४ दिन आईसीयू (ICU) में और कुल मिलाकर १० से १२ दिन अस्पताल में अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में रखा जाता है।
  • पोषण प्रबंधन: आंतों की हीलिंग के लिए शुरुआत में नस के जरिए पोषण (TPN) दिया जाता है, जिसके बाद धीरे-धीरे मुंह से सुपाच्य, हल्का और उच्च प्रोटीन युक्त तरल भोजन शुरू कराया जाता है।
  • संक्रमण से सुरक्षा: घर लौटने के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इलाज के बाद शरीर की रोगप्रतिരോധक क्षमता अस्थाई रूप से कम होती है, इसलिए बाहरी लोगों का आना-जाना सीमित रखें और हमेशा उबला हुआ व साफ पानी ही दें।

निष्कर्ष

एडवांस पेट और ओवेरियन कैंसर के खिलाफ लड़ाई निश्चित रूप से कठिन है, लेकिन हाइपेक (HIPEC) जैसी अत्याधुनिक और कस्टमाइज्ड तकनीक ने इस लड़ाई का रुख मरीजों के पक्ष में मोड़ दिया है। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह अटूट विश्वास है कि जब सही सर्जिकल विशेषज्ञता, आधुनिकतम मशीनें और मानवीय संवेदनाएं एक साथ मिलती हैं, तो बड़ी से बड़ी बीमारी को भी पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है। एडवांस कैंसर से डरें नहीं; आधुनिक विज्ञान की ताकत को समझें और सही समय पर विशेषज्ञ परामर्श लें।

👉अधिक जानकारी के लिए आप देख सकते हैं: https://bit.ly/3h5bTEb

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