
जब किसी महिला या पुरुष को पेट में लगातार सूजन, भारीपन या अपच की शिकायत होती है, तो वे अक्सर इसे सामान्य गैस या खान-पान की गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब जांच के बाद डॉक्टर ‘पेरिटोनियल कैंसर’ (Peritoneal Cancer) का नाम लेते हैं, तो मरीज और उनका परिवार पूरी तरह असमंजस और डर में डूब जाता है। अधिकांश लोगों ने ओवेरियन, पेट या आंतों के कैंसर के बारे में सुना होता है, लेकिन ‘पेरिटोनियल कैंसर’ का नाम उनके लिए बिल्कुल नया होता है।
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी Centre, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि मरीजों को उनकी बीमारी के हर पहलू से सरल और स्पष्ट भाषा में रूबरू कराया जाए। जब परिवार बीमारी के सही स्वरूप को समझ लेता है, तो इलाज की राह आसान हो जाती है। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के दृष्टिकोण से सीधे और सरल शब्दों में समझते हैं कि पेरिटोनियल कैंसर क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और आज हमारे पास इसके इलाज के लिए क्या अत्याधुनिक विकल्प मौजूद हैं।
पेरिटोनियम (Peritoneum) हमारे पेट के अंदरूनी हिस्से की एक बेहद पतली, रेशमी और सुरक्षात्मक झिल्ली (पारदर्शी परत) होती है। यह झिल्ली हमारे पेट के सभी अंदरूनी अंगों—जैसे आंतों, लिवर, पेट और गर्भाशय को ढककर रखती है और उन्हें अपनी जगह पर सुरक्षित रखती है। यह एक विशेष द्रव्य (फ्लूइड) भी बनाती है जिससे अंगों के बीच आपसी घर्षण नहीं होता और वे सुचारू रूप से काम कर पाते हैं।
जब कैंसर की शुरुआत इसी झिल्ली (पेरिटोनियम) की कोशिकाओं से होती है, तो इसे प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर (Primary Peritoneal Cancer) कहा जाता है।
ओवेरियन कैंसर से इसका क्या संबंध है?: अंडाशय (Ovaries) की बाहरी परत और पेरिटोनियम झिल्ली, दोनों की उत्पत्ति भ्रूण के विकास के दौरान एक ही तरह की कोशिकाओं से होती है। यही वजह है कि प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर के लक्षण, उसका व्यवहार, शरीर में फैलने का तरीका और यहाँ तक कि उसका इलाज भी काफी हद तक एडवांस ओवेरियन कैंसर जैसा ही होता है। महिलाओं में यह अंतर कर पाना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि अंडाशय पूरी तरह स्वस्थ दिखने पर भी यह बीमारी पेट में फैल सकती है।
चूंकि पेरिटोनियम पेट के अंदरूनी हिस्से में होती है, इसलिए शुरुआती दौर में इसमें होने वाले बदलावों का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पेट के अंदरूनी हिस्से प्रभावित होने लगते हैं और निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
यदि ये लक्षण किसी भी व्यक्ति में ३ हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार बने रहते हैं, तो उन्हें केवल सामान्य गैस या बदहजमी मानकर टालना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
सटीक इलाज शुरू करने के लिए बीमारी के फैलाव को समझना सबसे पहला कदम है। इसके लिए निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों की मदद ली जाती है:
चूंकि यह कैंसर पूरी झिल्ली पर एक परत के रूप में फैला होता है, इसलिए इसका इलाज भी ‘मल्टी-मोडालिटी’ यानी कई उन्नत तकनीकों को मिलाकर किया जाता है। शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा ध्यान इस बात पर रहता है कि मरीज को न्यूनतम तकलीफ के साथ अधिकतम परिणाम मिल सकें।
इस इलाज का सबसे मुख्य उद्देश्य पेट के अंदर फैली हुई कैंसर की हर एक गांठ और प्रभावित झिल्ली (पेरिटोनियम) को पूरी तरह से साफ करना है। सर्जन पेट के उन सभी हिस्सों को हटा देते हैं जहाँ कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं। इसे पेट की पूरी सफाई या ‘डीबल्किंग’ कहते हैं, जो बची हुई बीमारी पर दवाओं के असर को कई गुना बढ़ा देती है।
अगर निदान के समय बीमारी बहुत ज्यादा फैली हो, तो सीधे बड़ी सर्जरी करना सुरक्षित नहीं होता। ऐसी स्थिति में हम पहले ३ चक्र (साइकिल्स) कीमोथेरेपी के देते हैं। इससे कैंसर तेजी से सिकुड़ जाता है, पेट का पानी सूख जाता है और फिर ‘इंटरवल साइटोरिडक्टिव सर्जरी’ के जरिए कैंसर को पूरी तरह निकाल दिया जाता है।
पेरिटोनियल कैंसर के इलाज में HIPEC तकनीक एक गेम-चेंजर साबित हुई है। सर्जरी के तुरंत बाद, जब पेट के अंदर की सभी बड़ी गांठें निकाल दी जाती हैं, तब ऑपरेशन थिएटर में ही मरीज के पेट के भीतर सीधे कीमोथेरेपी की दवा को लगभग ४२ डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके ९० मिनट के लिए प्रवाहित किया जाता है। यह गर्म दवा सीधे प्रभावित हिस्से के संपर्क में आती है और नग्न आंखों से न दिखने वाले सूक्ष्म कैंसर कणों को नष्ट कर देती है, जिससे बीमारी के दोबारा लौटने का जोखिम न्यूनतम हो जाता है।
इलाज पूरा होने के बाद कैंसर को वापस लौटने से रोकने के लिए आज हमारे पास PARP Inhibitors और टारगेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक दवाएं उपलब्ध हैं। ये दवाएं गोलियों के रूप में होती हैं जिन्हें मरीज घर पर रहकर आसानी से ले सकते हैं, और इनके साइड इफेक्ट्स पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में बहुत कम होते हैं।
इस बीमारी से लड़ रहे मरीज को शारीरिक से ज्यादा मानसिक संबल की जरूरत होती है। परिवार को चाहिए कि वे मरीज को पौष्टिक, उच्च प्रोटीन युक्त और घर का बना ताजा भोजन दें। कीमोथेरेपी और सर्जरी के बाद शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता अस्थाई रूप से कम हो जाती है, इसलिए घर में साफ-सफाई और संक्रमण (Infection) से बचाव का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें और अपनी मर्जी से कोई भी वैकल्पिक दवा शुरू न करें।
पेरिटोनियल कैंसर भले ही एक जटिल और गंभीर बीमारी है, लेकिन आज के आधुनिक चिकित्सा युग में एडवांस सर्जिकल तकनीकों जैसे साइटोरिडक्टिव सर्जरी, HIPEC और उन्नत दवाओं के बल पर इसे बहुत प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी का मतलब उम्मीदों का खत्म होना नहीं है। अहमदाबाद में हमारे सेंटर का अनुभव यही सिखाता है कि सही समय पर लिया गया सही फैसला और सकारात्मक पारिवरिक माहौल ही कैंसर के खिलाफ इस जंग की सबसे बड़ी पूंजी है। डर को छोड़ें, आधुनिक विज्ञान की ताकत पर भरोसा रखें और विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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