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  • May 20, 2026
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ओवेरियन ट्यूमर के लिए फ्रोजन सेक्शन सर्जरी के दौरान किया जा सकता है। ओवेरियन ट्यूमर में कैंसर है या नहीं, यह इसकी पुष्टि करता है

अहमदाबाद के शाह्स कैंसर सेंटर में एक महिला मरीज और उनके परिवार को डिजिटल चार्ट के माध्यम से ओवेरियन ट्यूमर की सर्जरी और फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए वरिष्ठ ऑन्को-सर्जन।

जब किसी महिला को अंडाशय की गांठ (Ovarian Tumor) के लिए सर्जरी कराने की सलाह दी जाती है, तो ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले मरीज और उनके परिवार के मन में सबसे बड़ी शंका यही होती है—”क्या यह गांठ साधारण है या कैंसर की?” आमतौर पर, किसी भी ट्यूमर के कैंसर होने की अंतिम पुष्टि बायोप्सी की विस्तृत रिपोर्ट (Histopathology) से होती है, जिसमें आने में लगभग ५ से ७ दिनों का समय लगता है।

लेकिन अंडाशय की सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। अगर सर्जन को केवल ५% शंका हो कि गांठ कैंसर हो सकती है, तो क्या उन्हें केवल गांठ निकालनी चाहिए या पूरा गर्भाशय और आसपास के हिस्से भी साफ कर देने चाहिए? इस दुविधा को दूर करने के लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने हमें एक अद्भुत और जीवन रक्षक तकनीक दी है, जिसे फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी (Frozen Section Biopsy) या इंट्राऑपरेटिव कंसल्टेशन कहा जाता है।

इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे सुरक्षित और सटीक कैंसर केयर मिल सके। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझते हैं कि फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी क्या है, यह अंडाशय की सर्जरी के दौरान कैसे काम करती है और यह मरीजों को दो बार ऑपरेशन कराने की तकलीफ से कैसे बचाती है।

फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी वास्तव में क्या है?

आमतौर पर बायोप्सी की प्रक्रिया में ट्यूमर के टुकड़े को रसायनों में सुखाया जाता है, वैक्स ब्लॉक बनाए जाते हैं और फिर बेहद पतली परतें काटकर माइक्रोस्कोप के नीचे जांचा जाता है, जिसमें कई दिन लगते हैं।

इसके विपरीत, फ्रोजन सेक्शन एक ‘ऑन-द-स्पॉट’ या रियल-टाइम बायोप्सी है जो तब की जाती है जब मरीज ऑपरेशन थियेटर में बेहोश (सर्जरी की स्थिति में) ही होता है। इसमें रसायनों का हफ्तों इंतजार करने के बजाय, ट्यूमर के हिस्से को विशेष तकनीक से तुरंत अत्यधिक ठंडे तापमान पर जमा (Freeze) कर दिया जाता है, जिससे वह सख्त हो जाता है। इसके बाद पैथोलॉजिस्ट तुरंत उसकी पतली स्लाइस काटकर माइक्रोस्कोप के नीचे जांच करते हैं और मात्र १५ से २० मिनट के भीतर सर्जन को यह बता देते हैं कि गांठ साधारण (Benign) है, कैंसर (Malignant) है, या बॉर्डरलाइन (Borderline) है।

ओवेरियन ट्यूमर की सर्जरी में इसकी भूमिका कितनी बड़ी है?

अंडाशय के कैंसर में फ्रोजन सेक्शन तकनीक एक गेम-चेंजर साबित होती है। इसके मुख्य कारणों को हम निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:

१. दो बार ऑपरेशन कराने की तकलीफ से मुक्ति

मान लीजिए फ्रोजन सेक्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं है और डॉक्टर ने केवल अंडाशय की गांठ निकालकर सर्जरी पूरी कर दी। ६ दिन बाद फाइनल रिपोर्ट में पता चला कि वह कैंसर था। ऐसी स्थिति में मरीज को दोबारा पूरा पेट खुलवाकर गर्भाशय, दूसरा अंडाशय और पेट की झिल्लियां (Omentum) साफ कराने के लिए दूसरा बड़ा ऑपरेशन कराना पड़ेगा। फ्रोजन सेक्शन इस जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देता है। यदि ऑपरेशन के बीच में ही कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो सर्जन उसी वक्त पूरी ‘कैंसर स्टेजिंग सर्जरी’ संपन्न कर देते हैं।

२. युवा महिलाओं में प्रसव क्षमता (Fertility) को बचाना

यदि किसी युवा या अविवाहित लड़की के अंडाशय में बड़ी गांठ है, तो डॉक्टर के लिए यह निर्णय लेना बहुत संवेदनशील होता है कि उसका पूरा अंडाशय निकाला जाए या नहीं। फ्रोजन सेक्शन की मदद से यदि १५ मिनट में यह साफ हो जाता है कि गांठ पूरी तरह साधारण (Benign) है, तो सर्जन केवल गांठ को बाहर निकालते हैं और लड़की के तंदुरुस्त अंडाशय व गर्भाशय को सुरक्षित छोड़ देते हैं, ताकि भविष्य में वह मां बन सके।

३. बॉर्डरलाइन ट्यूमर (Borderline Tumors) की सही पहचान

ओवेरियन ट्यूमर में एक विशेष श्रेणी होती है जिसे ‘बॉर्डरलाइन ट्यूमर’ कहते हैं। ये न तो पूरी तरह साधारण होते हैं और न ही पूरी तरह आक्रामक कैंसर। फ्रोजन सेक्शन के जरिए पैथोलॉजिस्ट ऑपरेशन के दौरान ही इसकी सटीक प्रकृति को भांप लेते हैं, जिससे सर्जन को यह तय करने में मदद मिलती है कि सर्जरी का दायरा कितना रखना है।

ऑपरेशन थियेटर के भीतर: यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

शाह्स कैंसर सेंटर, अहमदाबाद में इस अत्याधुनिक प्रक्रिया को एक अत्यंत समन्वित टीम वर्क के साथ अंजाम दिया जाता है:

  • गांठ को बाहर निकालना: सर्जरी की शुरुआत में (चाहे वह लैप्रोस्कोपिक हो, ओपन हो या आधुनिक रोबोटिक सर्जरी), सर्जन प्रभावित अंडाशय या गांठ को बिना फोड़े पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकालते हैं।
  • पैथोलॉजी लैब में रश डिलीवरी: ऑपरेशन थियेटर के ठीक बगल में स्थित फ्रोजन सेक्शन लैब में इस ताजे ट्यूमर को तुरंत भेजा जाता है।
  • अत्यधिक ठंड में जमाना (Freezing): पैथोलॉजिस्ट ट्यूमर के सबसे संदेहास्पद हिस्से को एक विशेष मशीन, जिसे क्रायोस्टेट (Cryostat) कहते हैं, के भीतर -२० से -३० डिग्री सेल्सियस तापमान पर तुरंत जमा देते हैं।
  • तुरंत रिपोर्ट: सख्त हुए टुकड़े की बारीक परतें काटकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। पैथोलॉजिस्ट सीधे ऑपरेशन थियेटर में सर्जन को इंटरकॉम या वॉक थ्रू के जरिए परिणाम बताते हैं।
  • आगे का सर्जिकल फैसला: रिपोर्ट के आधार पर सर्जन सर्जरी को तुरंत कस्टमाइज करते हैं। यदि गांठ साधारण है, तो ऑपरेशन वहीं समाप्त हो जाता है। यदि कैंसर है, तो व्यापक कैंसर सर्जरी तुरंत आगे बढ़ा दी जाती है।

मरीजों और परिवारों के लिए व्यावहारिक सलाह

यदि आपके ऑन्को-सर्जन ने ओवेरियन ट्यूमर की सर्जरी के दौरान ‘फ्रोजन सेक्शन’ की तैयारी रखने को कहा है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मरीज को कैंसर ही है। यह एक सुरक्षात्मक और वैज्ञानिक बैकअप प्लान है, जो ऑपरेशन टेबल पर डॉक्टरों को शत-प्रतिशत सटीक और सुरक्षित निर्णय लेने की शक्ति देता है। सर्जरी से पहले अपने डॉक्टर से इस बारे में खुल कर बात करें और आश्वस्त रहें कि आधुनिक विज्ञान आपकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है।

निष्कर्ष

अंडाशय की गांठ की सटिक प्रकृति को ऑपरेशन के दौरान ही भांप लेना चिकित्सा विज्ञान का एक अद्भुत और परोपकारी चमत्कार है। फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी (Frozen Section Biopsy) न केवल मरीजों को मानसिक तनाव से बचाती है, बल्कि उन्हें एक ही एनेस्थीसिया के भीतर संपूर्ण और सटीक इलाज की गारंटी देती है। अहमदाबाद के शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर में हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि सर्वश्रेष्ठ सर्जिकल तकनीक और कुशल पैथोलॉजी का यह संगम ही कैंसर के खिलाफ हमारी इस जंग की सबसे बड़ी ताकत है। सजग रहें, सकारात्मक रहें।

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