
जब किसी युवा महिला या युवती को ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होने का पता चलता है, तो वह केवल एक जानलेवा बीमारी से ही नहीं जूझ रही होती, बल्कि उसके सामने एक और बेहद संवेदनशील और दर्दनाक सवाल खड़ा हो जाता है—”क्या मैं कभी मां बन पाऊंगी?” एक ऐसी महिला के लिए जिसने अभी अपना परिवार शुरू नहीं किया है या जो भविष्य में बच्चे पैदा करने की इच्छा रखती है, यह शंका उसके मानसिक तनाव को कई गुना बढ़ा देती है।
पारंपरिक तौर पर ओवेरियन कैंसर का इलाज व्यापक सर्जरी होता था, जिसमें गर्भाशय और दोनों अंडाशयों को पूरी तरह निकाल दिया जाता था, जिससे मां बनने की संभावनाएं हमेशा के लिए खत्म हो जाती थीं। लेकिन आज के आधुनिक चिकित्सा युग में एडवांस सर्जिकल तकनीकों और प्रजनन संरक्षण (Fertility Preservation) के तरीकों ने इस परिदृश्य को बदल दिया है। आज कैंसर को हराने के साथ-साथ मातृत्व के सपने को सुरक्षित रखना पूरी तरह संभव है।
इंडियन ओवरी कैंसर इंस्टीट्यूट (IOCI) और शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर, अहमदाबाद में हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि युवा मरीजों को न केवल बेहतरीन कैंसर ट्रीटमेंट मिले, बल्कि उनकी जिंदगी के भविष्य के सपनों को भी पूरा संबल दिया जा सके। आइए, एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के नजरिए से बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझते हैं कि ओवेरियन कैंसर के इलाज के दौरान प्रजनन क्षमता को कैसे बचाया जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर से लड़ने के लिए मुख्य रूप से तीन प्रकार के उपचार अपनाए जाते हैं, और इन तीनों का महिला के प्रजनन तंत्र पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है:
युवा महिलाओं में यदि कैंसर की पहचान बहुत शुरुआती चरण (Early Stage) में हो जाती है, तो डॉक्टर फर्टिलिटी-स्पेयरिंग सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं। यह चिकित्सा विज्ञान का एक बेहद परोपकारी दृष्टिकोण है।
शाह्स कैंसर सेंटर, अहमदाबाद में युवा महिलाओं की फर्टिलिटी-स्पेयरिंग सर्जरी के लिए हम अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम को प्राथमिकता देते हैं। अंडाशय के नाजुक ऊतकों के पास काम करते समय यह तकनीक एक वरदान साबित होती है:
यदि बीमारी ऐसी स्थिति में है जहां दोनों अंडाशयों को निकालना बेहद जरूरी है, तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। कैंसर का इलाज शुरू होने से ठीक पहले ओंको-फर्टिलिटी (Onco-Fertility) तकनीकों की मदद से मातृत्व को सुरक्षित किया जा सकता है:
૧. अंडा फ़्रीज़ करना (Egg Freezing): इलाज शुरू होने से पहले महिला के अंडाशय से परिपक्व अंडों को निकालकर प्रयोगशाला में बेहद ठंडे तापमान पर सुरक्षित (Cryopreservation) रख लिया जाता है। कैंसर से पूरी तरह ठीक होने के बाद, इन अंडों का उपयोग करके बच्चा पैदा किया जा सकता है।
૨. भ्रूण फ़्रीज़ करना (Embryo Freezing): यदि महिला विवाहित है, तो उसके अंडों को पति के शुक्राणुओं के साथ आईवीएफ तकनीक से निषेचित करके ‘भ्रूण’ तैयार कर लिया जाता है और उसे सुरक्षित रख लिया जाता है।
૩. ओवेरियन टिश्यू फ्रीजिंग: यह एक बहुत ही आधुनिक विधा है जिसमें अंडाशय के एक छोटे से स्वस्थ हिस्से को सर्जरी द्वारा निकालकर सुरक्षित रख लिया जाता है और इलाज पूरा होने के बाद उसे वापस शरीर में प्रत्यारोपित (Transplant) किया जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर निश्चित रूप से एक कठिन चुनौती है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि एक महिला को अपने मां बनने के अधिकार का त्याग करना पड़े। सही समय पर सही ऑन्को-सर्जन का चयन, आधुनिक रोबोटिक तकनीकों का प्रयोग और फर्टिलिटी विशेषज्ञों के साथ तालमेल बिठाकर आज हम कई युवा महिलाओं के आंगन में खुशियां लाने में सफल रहे हैं। अहमदाबाद के शाह्स कैंसर एंड रोबोटिक सर्जरी सेंटर में हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि इलाज ऐसा होना चाहिए जो न केवल जान बचाए, बल्कि जीवन के हर खूबसूरत सपने को भी जिंदा रखे। हिम्मत रखें, सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है।
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