Blog Details

  • May 20, 2026
  • comments (0)
  • 1 min read

ओवेरियन ट्यूमर के लिए टेस्ट अल्ट्रासाउंड – ट्यूमर के आकार और प्रकार को दर्शाता है। एमआरआई – यह बताता है कि ट्यूमर सामान्य है या कैंसर। सीटी स्कैन – कैंसर के विस्तार और चरण को दर्शाता है।

अहमदाबाद के शाह्स कैंसर सेंटर में एक युवा महिला मरीज और उनके पति को डिजिटल स्क्रीन पर ओवेरियन कैंसर के इलाज के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility) सुरक्षित रखने के उपाय समझाते हुए वरिष्ठ महिला कैंसर विशेषज्ञ।

ओवेरियन ट्यूमर (अंडाशय के ट्यूमर या कैंसर) की पहचान के लिए किए जाने वाले टेस्ट और जांच प्रक्रियाओं के बारे में है।

अंडाशय (Ovary) में गांठ या ट्यूमर का पता लगाने, और यह समझने के लिए कि वह सामान्य (Benign) है या कैंसरयुक्त (Malignant), डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित मुख्य टेस्ट कराने की सलाह देते हैं:

1. इमेजिंग टेस्ट (Imaging Tests)

ये टेस्ट डॉक्टर को अंडाशय के आकार, बनावट और संरचना को देखने में मदद करते हैं:

  • ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVUS): यह सबसे पहला और मुख्य टेस्ट है। इसमें एक छोटी प्रोब को योनि (vagina) के जरिए अंदर डालकर ध्वनि तरंगों की मदद से अंडाशय की साफ तस्वीरें ली जाती हैं। इससे यह पता चलता है कि गांठ ठोस (solid) है या उसमें पानी भरा है (cyst)।
  • सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई (MRI): अगर ट्यूमर बड़ा है, तो यह देखने के लिए कि क्या यह आसपास के अंगों या लिम्फ नोड्स (lymph nodes) में फैल गया है, सीटी या एमआरआई स्कैन किया जाता है।

2. ब्लड टेस्ट (Blood Tests / Tumor Markers)

  • CA-125 टेस्ट: यह एक विशेष ब्लड टेस्ट है जो रक्त में CA-125 नामक प्रोटीन के स्तर को मापता है। ओवेरियन कैंसर होने पर अक्सर इसका स्तर बढ़ जाता है।

ध्यान दें: CA-125 का स्तर बढ़ना हमेशा कैंसर ही नहीं होता। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, फाइब्रॉएड या एंडोमेट्रियोसिस जैसी सामान्य समस्याओं में भी यह बढ़ सकता है।

3. फिजिकल और पेल्विक जांच (Physical & Pelvic Exam)

  • डॉक्टर पेट को बाहर से दबाकर किसी असामान्य गांठ या सूजन को महसूस करने की कोशिश करते हैं।
  • आंतरिक पेल्विक जांच (Pelvic Exam) के जरिए गर्भाशय और अंडाशय के आकार की जांच की जाती है।

4. बायोप्सी और सर्जरी (Biopsy & Surgery)

सटीक पुष्टि के लिए सर्जरी (जैसे लैप्रोस्कोपी या लैप्रोटोमी) के जरिए ट्यूमर या प्रभावित हिस्से को निकाला जाता है और फिर लैब में उसकी जांच (बायोप्सी) की जाती है।

ओवेरियन ट्यूमर के मामलों में शरीर के बाहर से सुई डालकर बायोप्सी (टुकड़ा लेना) आमतौर पर नहीं की जाती, क्योंकि इससे कैंसर कोशिकाओं के फैलने का खतरा रहता है।

🔸अधिक जानने के लिए: https://bit.ly/2MFFW8q

#ovariancancer #ovary #ovarycyst #cyst #cancerawareness #cancer #cancerfree #healthcare #fightagainstcancer #cancerclinix #letsfightcancer #healthyliving #fitness #medical #science #surgery #surgeon #doctor #health #healthtip #stayhealthy #gujarat #ahmedabad

Tag:
Share Article:

admin

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Make An Appointment!