• October 7, 2026
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Ovary, tube और peritoneum के cancer के लक्षण: जाँच कब और पहले कौन-सी | IOCI

पेट फूलना या पानी भरना: ovarian cancer की जाँच कब?

आख़िरी बार अपडेट: 05-Oct-2026

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Dr Swati Shah, ovary cancer surgeon, अहमदाबाद
Dr Swati Shah
MS, DrNB (Surgical Oncology)
Ovary Cancer Surgeon · 18 साल का अनुभव
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad
★★★★★ 5.0 · 18 Google reviews
संक्षेप में

नया शुरू हुआ पेट फूलना, जल्दी पेट भरना या पेड़ू का दर्द हफ़्तों से ज़्यादातर दिन रहे, तो गैस की और दवा नहीं — sonography कराएँ.

Ovary, fallopian tube और peritoneum का cancer एक ही बीमारी माना जाता है. लक्षण एक जैसे, जाँच एक जैसी और इलाज का रास्ता भी एक.

किसी भी chemotherapy से पहले tissue से बीमारी पक्की की जाती है, और markers देखे जाते हैं, ताकि आँत या पेट का cancer छूट न जाए.

लक्षण आम हैं, उनका ढंग आम नहीं

Ovarian cancer के शुरुआती लक्षण वही हैं जो लगभग हर महिला को कभी न कभी हुए हैं. फ़र्क़ इसमें है कि ये लक्षण कैसा बर्ताव करते हैं.

ज़्यादातर महिलाएँ ये चार तकलीफ़ें लेकर आती हैं: पेट फूला या कसा हुआ रहना, दो-चार कौर में पेट भर जाना, गैस जैसा लगना, और पेड़ू या निचले पेट में हल्का दर्द. अलग-अलग देखें तो ये सब आम हैं और ज़्यादातर बेनुक़सान. ध्यान तब देना है जब ये नया शुरू हुआ हो, ज़्यादातर दिन रहता हो — महीने में बारह दिन से ज़्यादा — और आने-जाने के बजाय हफ़्तों से चल रहा हो. पचास साल से ऊपर की महिलाओं में यह सबसे ज़्यादा मायने रखता है.

घर में सबका ख़याल रखने वाली महिला अपने पेट को अक्सर “गैस है” कहकर टाल देती है. कुछ हफ़्ते गैस की दवा के बाद भी ज़्यादातर दिन पेट फूला रहे, तो अगला क़दम पेड़ू की sonography है, और तेज़ दवा नहीं.

Ovary, tube और peritoneum की एक ही बीमारी

अंडाशय (ovary), fallopian tube और peritoneum — पेट के अंदर की पतली झिल्ली — इन तीनों के cancer को एक ही बीमारी मानकर stage दिया जाता है और इलाज होता है.

इसलिए report में “tubal” या “primary peritoneal” cancer लिखा हो, तो यह कोई अनजानी, अलग बीमारी नहीं है. लक्षण वही, जाँच वही और इलाज का रास्ता भी ovarian cancer जैसा ही. Primary peritoneal cancer में scan पर ovaries लगभग normal दिख सकती हैं, जबकि बीमारी पेट की झिल्ली पर हो — इसलिए normal दिखती ovary अकेले खोज ख़त्म नहीं करती.

आँत या पेट (stomach) से शुरू होकर उसी झिल्ली पर फैला cancer अलग बीमारी है, और उसका इलाज भी अलग. इसलिए दोनों को अलग पहचानना जाँच का हिस्सा है.

डॉक्टर को पहले जो निशानी मिलती है

कभी-कभी पहला संकेत महिला को महसूस होने वाली तकलीफ़ नहीं, बल्कि जाँच या scan में मिली बात होती है.

  • पेट में पानी (ascites), जब liver की कोई बीमारी इसकी वजह न हो.
  • फेफड़े के पास पानी, और साथ में पेड़ू में गाँठ.
  • बच्चेदानी के बगल में गाँठ, जिसमें sonography पर ठोस हिस्सा, अंदर की दीवार पर उँगली जैसी उभरी रचना या अंदर ख़ून का बहाव दिखे.
  • वज़न घटना, जब पेट और आँत की जाँच normal आई हो और कोई और वजह न मिले.

इनमें से कोई भी एक बात हो, तो नीचे दी गई पूरी जाँच चाहिए — तीन महीने बाद दोबारा scan नहीं.

कौन-सी जाँच, और किस क्रम में

जाँच जितना ही ज़रूरी उसका क्रम है. हर जाँच जो जवाब देती है, अगली जाँच उसी पर टिकी होती है.

  1. योनि के रास्ते और पेट के ऊपर से sonography, standard IOTA या O-RADS भाषा में report, ताकि गाँठ का आकार और उसकी बनावट हर डॉक्टर एक ही तरह समझे.
  2. छाती, पेट और पेड़ू का contrast CT. इसमें omentum (पेट में लटकती चर्बी की जाली), डायफ्राम (diaphragm), liver के प्रवेश-द्वार का हिस्सा, आँत और lymph nodes दिखते हैं. आगे ऑपरेशन में सब निकल पाएगा या नहीं, यह यही तय करता है.
  3. ख़ून के markers: CA-125, CEA और CA 19-9. CA-125 और CEA के बीच का संतुलन मायने रखता है. यह साफ़ तौर पर ovary की तरफ़ इशारा न करे, तो आँत या पेट का cancer बाहर करने के लिए colonoscopy और upper GI endoscopy होती है.
  4. किसी भी chemotherapy से पहले tissue. Scan की मदद से ली गई core biopsy, या diagnostic laparoscopy. सिर्फ़ सुई से खींचा sample या पानी की जाँच काफ़ी नहीं. पेट या छाती का पानी निकाला जाए तो वह भी जाँच में जाता है.
  5. BRCA और HRD gene test, निदान के समय ही. पहले इलाज के बाद बीमारी क़ाबू में रखने वाली दवा इसी के नतीजे से तय होती है, और report आने में कुछ हफ़्ते लगते हैं.
  6. Routine ख़ून की जाँच और पोषण की जाँच. Blood count, kidney और liver test, albumin और clotting. वज़न घटा हो, albumin कम हो या खाना कम हो गया हो, तो ऑपरेशन से पहले dietitian जुड़ते हैं.

दो जाँचें अक्सर माँगी जाती हैं पर इस दौर में ज़्यादातर ज़रूरी नहीं: PET-CT, जो पेट के बाहर फैलाव के शक के लिए रखा जाता है, और पेड़ू का MRI, जो तभी होता है जब sonography पर गाँठ समझ न आए.

आपने क्या महसूस कियाक्या काफ़ी नहींक्या चाहिए
हफ़्तों से ज़्यादातर दिन पेट फूलनाएक महीना और गैस की दवापेड़ू की sonography
दो-चार कौर में पेट भर जानासिर्फ़ खाना बदलनाजाँच और sonography
पेट में बार-बार पानी भरनाबार-बार पानी निकलवाते रहनाTissue, markers और contrast CT
पेड़ू में ठोस हिस्से वाली गाँठतीन महीने बाद फिर scanMarkers, CT और planned biopsy
CA-125 बढ़ा हुआ आयासिर्फ़ अंक देखकर इलाज शुरूTissue से निदान और साथ में CEA

Stage ऑपरेशन के बाद ही पक्का क्यों?

CT से मिलने वाला stage अस्थायी है. Ovarian cancer का आख़िरी stage ऑपरेशन में तय होता है, जब surgeon हर सतह देखते हैं और pathologist निकाले गए ऊतक की जाँच करते हैं.

पेट की झिल्ली पर छोटी गाँठें scan में न दिखें इतनी पतली हो सकती हैं, इसलिए ऑपरेशन के बाद stage बदल सकता है. पहला इलाज शुरू होने से पहले हर केस tumour board पर चर्चा में जाता है.

ये निशानियाँ हों तो उसी दिन अस्पताल

  1. पेट फूला हो, उल्टी हो और गैस या शौच बिल्कुल न निकले — आँत रुक गई हो सकती है.
  2. पेट में इतना पानी कि साँस लेना मुश्किल हो जाए.
  3. पेट में अचानक बहुत तेज़ दर्द — गाँठ फट गई हो या उससे ख़ून बह रहा हो, ऐसा हो सकता है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट में बार-बार पानी भरता है, हर बार निकलवाना ही इलाज है?

नहीं. जिस महिला को liver की बीमारी न हो और पेट में बार-बार पानी भरे, उसमें वजह ढूँढनी ज़रूरी है. पानी की जाँच के साथ tissue, markers और contrast CT कराया जाता है. सिर्फ़ पानी निकालते रहने से वजह का पता नहीं चलता.

CT में cancer लग रहा है, तो सीधे इलाज क्यों नहीं, पहले biopsy क्यों?

क्योंकि इलाज से पहले बीमारी tissue से पक्की होनी चाहिए. आँत या पेट का cancer भी scan पर ovarian cancer जैसा दिख सकता है, और उसका इलाज अलग है. इसलिए chemotherapy से पहले core biopsy या diagnostic laparoscopy होती है.

CA-125 ज़्यादा आया है, तो क्या पक्का cancer है?

सिर्फ़ इससे नहीं. CA-125 दूसरी हालतों में भी बढ़ता है — हमारे यहाँ पेट की झिल्ली की TB उनमें से एक अहम हालत है. इसे sonography, CT और CEA के साथ पढ़ा जाता है, और निदान हमेशा tissue से होता है.

क्या शुरू में ही PET-CT करवा लेना चाहिए?

आम तौर पर नहीं. शुरुआती जाँच में contrast CT काफ़ी है. PET-CT तब रखा जाता है जब पेट के बाहर फैलाव का शक हो, या बाद में बीमारी लौटने पर तस्वीर साफ़ न हो.

BRCA test इलाज शुरू होने से पहले ही क्यों भेजा गया?

क्योंकि पहले इलाज के बाद बीमारी क़ाबू में रखने वाली दवा इसी के नतीजे से तय होती है, और report आने में कुछ हफ़्ते लगते हैं. निदान के समय भेजने से जवाब ज़रूरत के वक़्त तैयार रहता है.

Gota OPD में Dr Swati Shah से consultation book करें — +91-63590-11009

जुड़े हुए पेज

जाँच में cancer पक्का हुआ हो, तो इस site का मुख्य इलाज वाला पेज पढ़ें: अहमदाबाद में ovarian cancer का ऑपरेशन.

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre

Dr Swati Shah — MS, DrNB (Surgical Oncology) · Ovary Cancer Surgeon

Indian Ovary Cancer Institute I Ovary cyst & tumour treatment — SF-203, 2nd Floor, Olive Greens, Gota, S G Highway, Ahmedabad, Gujarat 382481

Dr Swati Shah Gynec Oncologist I Uterus, Cervix, Ovary Cancer I Robotic & CRS HIPEC — Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar, Gujarat 382428

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