मिथक : अंडाशय का कैंसर वृद्ध महिलाओं में ही होता है । तथ्य: ओवेरियन कैंसर युवा लड़कियों में भी देखा जा सकता है।
May 20, 2026
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मिथक : अंडाशय का कैंसर वृद्ध महिलाओं में ही होता है । तथ्य: ओवेरियन कैंसर युवा लड़कियों में भी देखा जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर (अंडाशय के कैंसर) से जुड़े एक बड़े मिथक (Myth) के बारे में है—कि यह केवल वृद्ध या बड़ी उम्र की महिलाओं को ही होता है।
समाज में यह एक आम गलतफहमी है कि युवाओं को कैंसर नहीं हो सकता, लेकिन यह लेख इस बात को स्पष्ट करता है कि ओवेरियन कैंसर किसी भी उम्र की महिला या किशोरी को प्रभावित कर सकता है।
इस विषय से जुड़े प्रमुख मिथकों और उनकी वास्तविक सच्चाइयों (Facts) को आप नीचे दिए गए विवरण से समझ सकते हैं:
मिथक 1: ओवेरियन कैंसर केवल बुजुर्ग या मेनोपॉज के बाद वाली महिलाओं को होता है।
सच्चाई: यह सच है कि ओवेरियन कैंसर का खतरा उम्र के साथ (विशेषकर 50-60 वर्ष के बाद) बढ़ता है, और सबसे आम प्रकार का कैंसर (एपिथेलियल) इसी उम्र में होता है। लेकिन, यह कम उम्र की युवतियों, किशोरियों और यहाँ तक कि बच्चों में भी हो सकता है।
कम उम्र की महिलाओं में आमतौर पर जर्म सेल ट्यूमर (Germ Cell Tumors) पाया जाता है, जो अंडाशय की उन कोशिकाओं में विकसित होता है जो अंडे बनाती हैं।
मिथक 2: यदि परिवार में किसी को ओवेरियन कैंसर नहीं है, तो मुझे कोई खतरा नहीं है।
सच्चाई: हालांकि पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक म्यूटेशन (जैसे BRCA1 या BRCA2 जीन) जोखिम को बहुत बढ़ा देते हैं, लेकिन ओवेरियन कैंसर से पीड़ित अधिकांश महिलाओं का कोई पारिवारिक इतिहास नहीं होता। यह किसी को भी अचानक (Sporadic) जेनेटिक म्यूटेशन या अन्य लाइफस्टाइल कारणों से हो सकता है।
मिथक 3: पैप स्मियर (Pap Smear) टेस्ट से ओवेरियन कैंसर का पता चल जाता है।
सच्चाई: यह महिलाओं के बीच सबसे खतरनाक मिथकों में से एक है। पैप स्मियर टेस्ट केवल सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर) की पहचान के लिए होता है, ओवेरियन कैंसर के लिए नहीं। ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVUS) और CA-125 ब्लड टेस्ट जैसे विशेष टेस्ट करने पड़ते हैं।
मिथक 4: ओवेरियन कैंसर के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते।
सच्चाई: इसे अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। लेकिन लक्षण होते जरूर हैं—जैसे लगातार पेट फूलना (Bloating), पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द, जल्दी पेट भर जाना और बार-बार पेशाब आना। यदि ये लक्षण कुछ हफ्तों तक लगातार बने रहें, तो इन्हें आम गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
युवा महिलाओं और किशोरियों में भी पेट दर्द या अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षणों को सामान्य दर्द समझकर टालना नहीं चाहिए। उम्र चाहे जो भी हो, शरीर में होने वाले लगातार बदलावों के प्रति जागरूक रहना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।